करेली 11/09 /2019
अनीति पूर्वक कमाया गया धन नष्ट हो जाता है- मुनि श्री
(विश्व स्तरीय दस लक्षण महापर्व उत्तम आकिंचन्य धर्म)

राष्ट्रहित चिंतक, सर्वश्रेष्ठ आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य
मुनि श्री विमल सागर जी,
मुनि श्री अनन्तसागर जी,
मुनि श्री धर्मसागर जी,
मुनि श्री अचलसागर जी,
मुनि श्री भाव सागर जी,ससंघ सानिध्य में
श्री महावीर दिगंबर जैन बडा मंदिर सुभाष मैदान मैं पर्यूषण पर्व के नौवे दिन उत्तम आकिंचन्य धर्म पर विभिन्न आयोजन हुए । प्रातः काल मुनि श्री भाव सागर जी ने शिविरार्थीओ को ध्यान करवाया फिर आचार्य भक्ति हुई फिर अभिषेक, शांतिधारा, विशेष पूजन , इष्टोपदेश ग्रंथ की कक्षा मुनि श्री अनंत सागर जी के द्वारा ली जा रही है, तत्वार्थ सूत्र का वाचन प्रतिदिन हो रहा है, मुनि श्री के प्रवचन 10 धर्मों पर हो रहे हैं, रात्रि में आरती, शास्त्र प्रवचन, कवि सम्मेलन हुआ ।यह कार्यक्रम ब्रह्मचारी रजनीश भैया जी रहली के निर्देशन में चल रहे हैं । इन कार्यक्रमों में सभी का विशेष योगदान मिल रहा है । ।इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए ।
मुनि श्री विमल सागर जी ने कहा कि त्याग तो वह होता है जिसमें कोई अपेक्षा नहीं होती है। दान वह होता है जिसमें किसी प्रकार की आकांक्षा नहीं होती है। जो अवसर पर दिया जाता है। जिस वस्तु कि जिस समय आवश्यकता है वह दान अमूल्य हो जाता है। इस धन की सार्थकता करना चाहते हो तो चार प्रकार का दान दीजिए ।मुनिराज भी ज्ञान का दान करते हैं। जो ग्रहस्थ जीवन में दान नहीं करता है वह श्रावक नहीं है ।जो भोजन तैयार किया है उसमें से एक भाग अतिथि का होता है ।दान और पूजा में लगा श्रावक मोक्ष मार्ग में लगा हुआ है ।दान देने के बाद ग्रहस्थ बहुत ऊंचा उठ जाता है। दान के साथ प्रिय वचन दुर्लभ हैं ।यह त्याग धर्म शिक्षा देता है जो धारण करेगा वही आगे बढ़ेगा।
मुनि श्री अनंत सागर जी कहा कि आज का दिन महत्वपूर्ण है । मुनि श्री अचल सागर जी ने कहा कि जो धर्म को धारण करता है। वह संसार समुद्र से पार हो जाता है।
मुनि श्री भाव सागर जी ने कहा कि दान देने से सभी का उपकार होता है ।त्याग के बिना न देशभक्ति हो सकती है ना आत्म कल्याण ।त्याग बुराइयों का होता है और दान अच्छी चीजों का। मनुष्य मान को त्याग देने पर प्रिय होता है ।धन की सफलता दान में है ।दान, भोग और नाश ये धन की तीन गति होती हैं। शास्त्रों में लिखा है कि अनीति पूर्वक कमाया गया धन 11 वे वर्ष में नष्ट हो जाता है। अन्याय का धन चोरी हो जाता है बीमारी में जाता है। इसलिए दान अवश्य करना चाहिए। समाज में एक साधर्मी फंड बनाना चाहिए जिससे गरीबों की चिकित्सा हो सके ।पाठशाला में सहयोग करना शास्त्र दान के अंतर्गत आता है। गौशाला में सहयोग करना अभय दान के अंतर्गत आता है। धन को गाड़ कर रखने की अपेक्षा दान देकर धन गाढा बनाओ। मंदिर की सुरक्षा में भावना के साथ-साथ धन लगाइए। धन त्याग से शोभा को प्राप्त होता है। प्रतिष्ठा धन की नहीं त्याग की होती है। दान देने वाले का हदय विशाल होता है ।मनुष्य कमाता तो दो हाथ से है खाता एक हाथ से है। पुण्य से कमाओ और पुण्य मैं लगाओ।कमेटी ने बताया कि 12सितंबर को उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के दिन प्रातः 6 बजे लगभग 75प्रतिमाओं का विशेष अभिषेक महा शांति धारा होगी । फिर अनंत चतुर्दशी पर श्री वासुपूज्य भगवान का मोक्ष कल्याणक निर्वाण लाडू अर्पण के साथ मनाया जाएगा रात्रि 9 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम की विशेष प्रस्तुति होगी। 13 सितंबर शुक्रवार को प्रातः 8बजे सभी श्रावकों के साथ शिविरार्थीओ एवं उपवास वालों की प्रभावना यात्रा नगर में निकलेगी एवं इसके पश्चात सुभाष मैदान में सभी 5 से अधिक उपवास करने वालों का सम्मान कमेटी के द्वारा किया जाएगा प्रतिदिन के कार्यक्रम भी होंगे।श्री अरहनाथ भगवान की प्रतिमा विराजमान करने का सौभाग्य कोमल चंद संतोष कुमार सौरभ कुमार गौरव कुमार मोदी गौरव ट्रेडर्स परिवार को प्राप्त हुआ
श्री शांतिनाथ जी, श्री कुंथुनाथ जी, श्री अरह नाथ जी, त्रिमूर्ति की वेदी का सौभाग्य गुलजारीलाल प्रकाश चंद अखिलेश सिंघई परिवार को प्राप्त हुआ। श्री अरह नाथ भगवान की प्रतिमा विराजमान का सौभाग्य कैलाश चंद अंकित कुमार एवं विकास कुमार विनीश कुमार विवेक कुमार जैन सगोरिया वालो को प्राप्त हुआ। चौबीसी की एक प्रतिमा का सौभाग्य अजीत कुमार स्वरूप चंद जैन को प्राप्त हुआ। नवीन मूलनायक श्री महावीर भगवान की वेदी का सौभाग्य श्री संजय कुमार दीपेश कुमार शैलेंद्र कुमार सिंघई परिवार को प्राप्त हुआ ।और भी कई लोगों ने सौभाग्य प्राप्त किए।

प्रेषक :
आशीष जैन ( टी.वी न्यूज़ रिपोर्टर ) 9425467816

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